Posts Tagged ‘desire’

नै बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा हूँ

नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ
मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ
गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा न तर्ज़े-जाम४
इस मैकदे के बीच अबस५ आफ़रीदा६ हूँ
तू आपसे७ ज़बाँज़दे-आलम८ है वरना मैं
इक हर्फ़े-आरज़ू९ सो ब-लब१० नारसीदा११ हूँ
कोई जो पूछता हो ये किस पर है दादख़्वाह१२
जूँ-गुल हज़ार जा से गरेबाँ-दरीदा हूँ१३
तेग़े-निगाहे-चश्म१४ का तेरे नहीं हरीफ़१५
ज़ालिम, मैं क़तर-ए-मिज़ए-ख़ूँचकीदा१६ हूँ
मैं क्या कहूँ कि कौन [...]

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जो इश्क़ की आग भड़क उठी है

जो इश्क़ की आग भड़क उठी है
जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ
तेरे बदन की कशिश का है जादू
देखकर तुझ को मचल रहा हूँ
मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी
मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ
एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि
तेरी मरमरीं बाँहों में पिघल रहा हूँ
शब्दार्थ:
1. ख़ाहिशो-तमन्ना: इच्छा और चाह
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है

वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है
जाने सही करता है या ग़लत करता है
वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं
दिल फिर भी उसकी हसरत करता है
उसने दिल तोड़ दिया है मेरा मगर
दिल है कि उसको मग़्फ़रत* करता है
वह चाहता है न देखूँ उसकी जानिब मैं
दिल बार-बार वही ज़ुर्रत करता है
शब्दार्थ: मग्फ़िरत या मग़्फ़रत: मोक्ष, यहाँ हर [...]

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ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए

ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए
वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें
मैं अब कहाँ ढूँढू जो था तुझमें
ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
भीगी-भीगी थी ज़मीं सूखे पाँव थे
जलते-बुझते पुराने घाव थे
ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
जुगनू दो आँखों में तिरने लगे हैं
चिन्गारियों से चुभने [...]

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उसने हमसे कभी वफ़ा न की

उसने हमसे कभी वफ़ा न की
और हमने भी तमन्ना न की
बहुत बोलते हैं सब ने कहा
सो आदत-ए-कमनुमा न की
बहुत आये बहुत गये मगर
जान किसी पर फ़िदा न की
उसने कही और हमने मानी
उसकी कोई बात मना न की
ख़ता-ए-इश्क़ के बाद हमने
फिर कभी यह ख़ता न की
बात थी सो दिल में रह गयी
सामने पड़े तो नुमाया न [...]

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