Posts Tagged ‘रात’

जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी

जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी
जब देखा था मंज़रे-हसीन-हुस्न1 मैंने
उस लम्हा चाँद था और सितारों की बरात थी
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
वह शब2 नहीं भूले जब घर आये थे तुम
उफ़! वह निगाह की निगाहों से [...]

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हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़

हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़
सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़
उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को
जो उनसे मिलके करते अपना दिल साफ़
आये तो मौत आये उनके सामने सुकूँ से
देखें वह रूह से छुटता हुआ मेरा लिहाफ़
ढल रही थी धीरे-धीरे सहर में यह रात
पड़ रहा धीरे-धीरे मेरे दिल में शिगाफ़
शब्दार्थ:
मुआफ़: [...]

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रातभर चाँद देखा किये

रातभर चाँद देखा किये
माज़ी में उड़ रहीं थीं
तेरी यादें समेटा किये
रातभर चाँद देखा किये
कभी हाथ से ढका चाँद को
कभी बादलों से उठाया भी
गदेली पर रखकर उसे
कभी होंटों तक लाया भी
रातभर चाँद देखा किये
माज़ी में उड़ रहीं थीं
तेरी यादें समेटा किये…
सितारे टूटते बुझते रहे
उनसे तुम्हें माँगते रहे
ख़ाली था ख़ामोश था लम्हा
हम तेरा नाम लिखते रहे
रातभर चाँद [...]

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यह मौसम भी तुम हो

यह मौसम भी तुम हो,
यह सावन भी तुम हो,
तुम हो… मेरे लिए…
मेरे सनम भी तुम हो
तुम नहीं होते’ तो तुम्हारा एहसास होता है
कोई जगता है रातों में, ख़ाबों के बीज बोता है
यह बिजली भी तुम हो,
यह बदली भी तुम हो,
तुम बूँदों में बरसती हो…
यह रिमझम भी तुम हो
गीले मन को बहुत सुखाया, मगर सूखा नहीं
मन [...]

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कुछ तो था कुछ तो है

कुछ तो था कुछ तो है
तेरे-मेरे बीच सजनी
वरना तुम यहाँ न आती
वरना यादें तेरी न होती
यूँ बरस गुज़रते हैं
तेरे लिए तड़पते हैं
तन्हा-तन्हा रात-दिन
तेरे लिए तुम बिन
कुछ तो था कुछ तो है
तेरे-मेरे बीच सजनी…
तुमको पाना है मुझे
मुझको अपनाना है तुझे
ग़म ख़ुशी बन जायेगा
दोनों को क़रीब लायेगा
वरना तुम यहाँ न आती
वरना यादें तेरी न होती…
ख़ाब सच हो [...]

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