Posts Tagged ‘ख़ुशबू’

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है
दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है
दर्द जो है इश्क़ में वह ही ख़ुदा है सबका
दर्द के पहलू में यार को सजदा किया जाता है
आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है…
तुम याद आ रहे हो और तन्हाई के सन्नाटे हैं
किन-किन दर्दों के [...]

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मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी

मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी
जो दुआ में तू मुझे माँग पाये कभी
टूट चुके हैं मेरी तमन्ना के दोश
तू ख़ुद संभाला देने को आये कभी
कबसे गया है न आया आज तक
मेरी आरज़ू तुझे खींच लाये कभी
ख़ुदाया मैं भटक रहा हूँ सहराँ में
कोई इस तस्कीं को मिटाये कभी
ग़मगीन शाम है और उदास हम
क्यों गुफ़्तगू का [...]

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काश यह सन्दली शाम महक जाती

काश यह सन्दली शाम महक जाती
सबा* तेरी ख़ुशबू वाले ख़त लाती
तुझसे इक़रार का बहाना जो मिलता
मेरी क़िस्मत शायद सँवर जाती
दीप आरज़ू का जलता है मेरे लहू से
काश तू इश्क़ बनके मुझे बुलाती
दूरियाँ दिल का ज़ख़्म बनने लगीं हैं
होता यह नज़दीकियों में बदल जाती
सबा: ताज़ा हवा, breeze
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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तुम गर हो सीना मुझको बना लो धड़कन

तुम गर हो सीना मुझ को बना लो धड़कन
आतिश बहे नस-नस में मिटे शीत की कम्पन
जिस सूरत पे दिल आ गया उसपे निसार है सब
मेरी यह उम्र, यह जान, यह यौवन
रंग-बिरंगे फूल खिले ख़ुशबू बिखरी हर-सू
मन की तितली फिरती है गुलशन-गुलशन
प्यार का जादू अब हम समझे क्या होता है
हम-तुम दोनों जैसे पानी और चन्दन
अब्रे-मेहरबाँ [...]

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शाख़ों पर लौट आये मौसम कोंपलों के

शाख़ों पर लौट आये मौसम कोंपलों के
न क्यों फिर खिले, गुल दो दिलों के
यह उम्र जायेगी तेरे लिये ज़ाया
गर यह फ़ासले रहे यूँ ही मीलों के
तुम नहीं तो चाँदनी उदास रहती है
सब ताज़ा कँवल सूख गये झीलों के
ज़ब्रो-सब्र से क़ाबू आया है दिल
हर लम्हा बढ़ते हैं दौर मुश्किलों के
मैं लोगों की भीड़ में तन्हा रहता [...]

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