Posts Tagged ‘ख़ाब’
28
Aug
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: अब्र, आग, आश्ना, आफ़त, इन्तिहाँ, इब्तिदा, इम्तिहाँ, इल्तजा, इश्क़, उदासियाँ, उम्र, उस्ताद, ऊदे-ऊदे बादल, औराक़े-गुल, कशिश, कारवाँ, किताब, कज़ा, ख़ता, ख़ला, ख़ाब, ख़ामोशियाँ, ख़ाहिश, ख़ुदा, ख़ुश, ग़रीब, चन्द्रमा, चमन, चाँद, चाँदनी, जहानो-शय, जादू, जादूगरी, जानम, जीवन, झगड़ा, तख़लीक़, तन्हा, तमाम शब, तस्वीर, ताअल्लुक, ताबीज़, तिश्नगी, तीरगी, तूफ़ान, दग़ा, दर्द, दर्दे-जुदाई, दर्दो-ग़म, दवा, दाग़े-हिज्र, दिल, दिलचस्पियाँ, दिलो-धड़कन, दीप, दुआ, दुनिया, दूरियाँ, दोस्त, दोस्ती, नशा, नसीब, नाआश्ना, नाराज़गी, नूर, नज़र, फूल, बंजर, बयान, बसेरा, बादल, बावफ़ा, बिजुरिया, बीमार, बेवफ़ा, मंज़िल, मरहम, मसीहा, माहे-सावन, माज़ी, मुकम्मिल, मुर्दा, मुसाफ़िर, मोहब्बत, मौसमे-वज़ा, यक़ीन, रहनुमा, रिदा, रुख़, लहू, वैराग, शबनम, शामो-सहर, सपना, सहर, साँस, सूरज, हया, हर्फ़, हलक़, हालात, हाले-दिल, हिज्र, क़त्ल, क़ाफ़िला, क़िस्मत, ज़माना, ज़मीं, ज़हराब, ज़िन्दगी, फ़ायदा, फ़ासले, फ़ीहा. 18 Comments
मुझे क्या हुआ है मुझे कुछ पता नहीं है
क्या मेरे दर्दो-ग़म की कोई दवा नहीं है
यह उदासियों की शामें बहुत उदास हैं
मेरे नसीब में क्या मौसमे-वज़ा1 नहीं है
आफ़त यह हम पर टूटकर आयी है
इसे देखने को क्या कोई ख़ुदा नहीं है
सब आश्ना आज ना’आश्ना2 बन गये हैं
ऐ तीरगी3! मेरा कोई रहनुमा4 नहीं है
दिलचस्पियाँ जीने में [...]
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8
May
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: arms, attraction, आग, इश्क़, उम्मीद, कशिश, ख़ाब, ख़ाहिश, जादू, तमन्ना, प्यार, बदन, बाँहें, मरमरीं, मोहब्बत, शोला, body, desire, dream, fire, hope, love, magic, silken, spell, wish. 24 Comments
जो इश्क़ की आग भड़क उठी है
जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ
तेरे बदन की कशिश का है जादू
देखकर तुझ को मचल रहा हूँ
मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी
मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ
एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि
तेरी मरमरीं बाँहों में पिघल रहा हूँ
शब्दार्थ:
1. ख़ाहिशो-तमन्ना: इच्छा और चाह
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४
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30
Apr
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: अश्क, आँखें, इश्क़, ख़ाब, ख़ुदा, खुश्क, ग़म, चेहरा, टुकड़े, दरया, दहलीज़, दुनिया, भँवर, मानिन्द, मामला, मुआफ़, मुश्क, रश्क़, रोज़, ज़ाहिर, clear, daily, dream, dry, envy, eyes, forgive, god, like that, love, piece, pond, river, sadness, smell, tears, threshold, whirl, world. 11 Comments
वह मुझको मुआफ़1 रखे दुनिया के मामलों से
मैं अब कभी किसी और से इश्क़ न करूँगा
दिल मेरा चाहे हो जाये टूटकर टुकड़े-टुकड़े
इस ग़म में आँखों को तर ऐ अश्क! न करूँगा
जो देखा है उस का चेहरा मैंने दो ही रोज़
इस बात का अपने ख़ुदा से रश्क2 न करूँगा
मेरे दिल में है तेरे ख़ाबों का इक [...]
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13
Apr
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: attraction, कशिश, ख़ाब, छाला, झूठा, दिल, मुस्कुराया, रूठा, सच्चा, क़रीब, blister, dream, heart, near, smile, truthful, ulcer. 10 Comments
वह मुस्कुराया और रूठा भी
वह सच्चा है और झूठा भी
दूर था तो क़रीब था दिल के
उसकी बात से दिल टूटा भी
इक ख़ाब माना हमने जिसको
वह छाला बनकर फूटा भी
जिस कशिश पे हम मर बैठे
उस कशिश ने दिल लूटा भी
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४
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31
Jan
Posted by विनय in मेरा गीत. Tagged: आँखें, इश्क़, कोना, ख़ाब, घाव, चिन्गारी, जुगनू, दिल, पाँव, प्यार, भीगा, मोहब्बत, हसरत, corner, damped, desire, dream, eyes, feet, firefly, heart, love, scar, spark, wet. 13 Comments
ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए
वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें
मैं अब कहाँ ढूँढू जो था तुझमें
ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
भीगी-भीगी थी ज़मीं सूखे पाँव थे
जलते-बुझते पुराने घाव थे
ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए
जुगनू दो आँखों में तिरने लगे हैं
चिन्गारियों से चुभने [...]
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