मेरी हर नज़र

June 14, 2008 at 7:56 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है,
लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है

रोज़-रोज़ की मुश्किली, यही वह अज़ाब है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४ 

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न कोई शिकायत है

June 14, 2008 at 7:28 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , )

न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है
तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ

कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है!

बाहम= आपस में


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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ज़ियाँ दिल का किया

April 13, 2008 at 11:53 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , )

ज़ियाँ दिल का किया जो तुमसे लगाया
तो पल-पल सीने में धड़कता क्या है?

तेरी आरज़ू मुझे कहाँ बहा ले जा रही है?

ज़ियाँ = loss


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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हम में जीतने का हौसला है

March 26, 2008 at 4:33 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’
यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे

यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में

March 18, 2008 at 11:05 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , )

सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में
अपनी भी दीवानगी कुछ कम नहीं

मैं और वह, दोनों कभी दोस्त थे!

सिफ़र= शून्य, zero


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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दिल का जला होता तब रोशनी होती

March 17, 2008 at 8:53 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

दिल का जला होता तब रोशनी होती
मैं तो जला हूँ चश्मे-अश्कबारी का…

अब मेरी ख़ाक इक निहाँ दलदल है!

चश्मे-अश्कबारी= rain of tears, निहाँ= hidden, buried
दलदल= marsh, quagmire, ख़ाक= ash, dust


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे

March 17, 2008 at 8:41 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , )

यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे
मगर जो तुम पर मिट गया वह ‘नज़र’ है

मेरी इब्तिदा तुम हो, मेरी इन्तिहाँ तुम हो!

इब्तिदा= beginning, start, इन्तिहाँ= end, zenith


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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