वह जब भी इस गली इस डगर आये
मेरी ज़िन्दगी की सहर1 बनकर आये
शबो-रोज़2 जलता हूँ मैं इन अंधेरों में
वह मेरे लिए कुछ रोशनी लेकर आये
आया था पिछली बार अजनबी बनकर
अब कि बार वह मेरा बनकर आये
हूँ बहुत दिनों से शाम की तरह तन्हा
कोई मंज़र-ए-सोहबत3 नज़र आये
दरवाज़े पे खड़ा हूँ इक यही आस लिये
वह मेरी बे-सदा4 [...]
Archive for May 4th, 2009
4 May
वह जब भी इस गली इस डगर आये
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: अंधेरा, अजनबी, असर, आस, आह, इल्ज़ाम, उम्मीद, उफ़क़, ख़बर, ख़ुशी, गली, गुल, गुलशन, गुलाबी, घर, चेहरा, डगर, तन्हा, दरवाज़ा, दिल, दुआ, दुनिया, नज़र, पयाम, प्यास, बला, बारिश, मंदिर, मंज़र, मखमली, मस्जिद, मुद्दत, रहम, रोशनी, रोज़, शब, शाम, शायद, शुआ, शफ़क़, सदा, सहर, सोहबत, ज़मीन, ज़िन्दगी, फ़ज़िर, blame, call, dark, day, door, effect, evening, evil, face, friendship, garden, happiness, heart, home, hope, kind, land, life, light, masjid, message, morning, news, night, path, pink, prayer, rain, rays, scene, sight, silken, sky, strange, street, temple, thirst, time, woe, world. 13 Comments




















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