जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी
जब देखा था मंज़रे-हसीन-हुस्न1 मैंने
उस लम्हा चाँद था और सितारों की बरात थी
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
वह शब2 नहीं भूले जब घर आये थे तुम
उफ़! वह निगाह की निगाहों से मुलाक़ात थी
हम ने दर्द पहने, ओढ़े और बिछाये हैं
एक नयी जलन की यह एक नयी शुरूआत थी
हमने जिसे दिल में जगह दी उसने दग़ा3 किया
हर एक मतलबी की अपनी एक ज़ात थी
रात बादल नहीं थे और चाँद भी रोशन था
साथ हो रही उस की यादों की बरसात थी
जिसने मुझे छूकर तख़लीक़4 किया है ‘नज़र’
गोया5 वह भी इक नज़रे-इल्तिफ़ात6 थी
शब्दार्थ:
1. हसीन हुस्न वाले मंज़र; 2. रात; 3. धोख़ा; 4. आस्तित्व में लाना; 5. जैसे; 6. दोस्ती की नज़र
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४




















Posted by pawan kumar on July 5, 2009 at 12:32 PM
sahi me bhayia ji aap bilkul profsnnll logo ki tarh likhte hai
Posted by prasanna vadan chaturvedi on April 28, 2009 at 8:59 PM
जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
waah!
Posted by महामंत्री तस्लीम on April 28, 2009 at 3:44 PM
जो गुजर गयी, उसी की वजह से तो इस गजल की रचना हुई है।
Posted by मोहन वशिष्ठ on April 24, 2009 at 9:57 PM
वह शब2 नहीं भूले जब घर आये थे तुम
उफ़! वह निगाह की निगाहों से मुलाक़ात थी
वाह विनय भाई हर एक शेर लाजवाव
Posted by विनय on April 24, 2009 at 6:25 PM
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
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Posted by mahendra mishra on April 24, 2009 at 6:13 PM
बहुत बढ़िया रचना . बधाई विनय जी
Posted by Dr Anurag on April 23, 2009 at 12:30 PM
ye sher khas pasand aaye vinya……
जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
जिसने मुझे छूकर तख़लीक़4 किया है ‘नज़र’
गोया5 वह भी इक नज़रे-इल्तिफ़ात6 थी
Posted by kmmishra on April 23, 2009 at 11:34 AM
Vinay Bhai apki Shairee Lazwaab hai. Shubhkamnai.
Posted by Manju on April 23, 2009 at 10:39 AM
Good Morng. Vinay ji,
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
Bahut hi sundar likha hain aapny, Har lines mein bahut kuch hain aapko badhaii, bahut sundar!