23
Apr
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: आँखें, इल्तिफ़ात, इश्क़, उजली, गोया, घर, चाँद, जलन, तख़लीक़, दग़ा, दर्द, दाँव-पेंच, निगाह, नज़र, पुरानी, प्यार, बरसात, बरात, बात, बादल, मंज़र, मतलबी, मात, मुलाक़ात, मोहब्बत, रात, रोशन, लम्हा, शब, शुरुआत, सितारे, हसीन, हुस्न, ज़ात, beauty, begining, cheat, clouds, defeat, envy, eyes, forgotten, friendship, home, lighten, like that, love, meeting, merry, moment, moon, nazar, night, originate, pain, scene, sight, stars, talk. 9 Comments
जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी
जब देखा था मंज़रे-हसीन-हुस्न1 मैंने
उस लम्हा चाँद था और सितारों की बरात थी
साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी
वह शब2 नहीं भूले जब घर आये थे तुम
उफ़! वह निगाह की निगाहों से [...]
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