आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है
दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है
दर्द जो है इश्क़ में वह ही ख़ुदा है सबका
दर्द के पहलू में यार को सजदा किया जाता है

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है…

तुम याद आ रहे हो और तन्हाई के सन्नाटे हैं
किन-किन दर्दों के बीच ये लम्हे काटे हैं
अब साँसें बिखरी हुई उधड़ी हुई रहती हैं
हमने साँसों के धागे रफ़्ता-रफ़्ता यादों में बाटे हैं

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है…

इस जनम में हम मिले हैं क्योंकि हमें मिलना है
तुम्हारे प्यार का फूल मेरे दिल में खिलना है
दूरियाँ तेरे-मेरे बीच कुछ ज़रूर हैं सनम
मगर यह फ़ासला भी एक रोज़ ज़रूर मिटना है

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है…


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

7 Responses to this post.

  1. Posted by Ashok Duhan Petwer on September 10, 2009 at 3:51 PM

    आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जा isk me mehsoos koi reet nahi hoti
    sanam ho samne to kimti koi cheej nahi hoti
    dil ki adalat me muqadma hai isk ka
    faisla me dard ki kabhi jeet nahi hoti ASHOK DUHAN PETWER HARYANA

    Reply

  2. Posted by Ashwani on July 25, 2009 at 1:33 PM

    isk me mehsoos koi reet nahi hoti
    sanam ho samne to kimti koi cheej nahi hoti
    dil ki adalat me muqadma hai isk ka
    faisla me dard ki kabhi jeet nahi hoti

    Reply

  3. आप सभी पाठकों का सह्रदय धन्यवाद

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  4. bahut sunadar geet hai.

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  5. इस जनम में हम मिले हैं क्योंकि हमें मिलना है
    तुम्हारे प्यार का फूल मेरे दिल में खिलना है
    दूरियाँ तेरे-मेरे बीच कुछ ज़रूर हैं सनम
    मगर यह फ़ासला भी एक रोज़ ज़रूर मिटना है

    Aap ke iis gazal me “pyar ke anubhuti” bhi hain vinay ji bahut sundar

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  6. bahut hi sunder,mehsu ho jaati hai dil ko.

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  7. और मैं इससे महसूस करने की कोशिश कर रहा हूं।

    ———–
    तस्‍लीम
    साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

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