17
Feb
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: चाँद, heart, eyes, दिल, मंज़िल, नाम, दुनिया, शाम, आँखें, destination, सुकूनो-सबात, story, लब, moon, sad, sky, world, lips, अंधेरी, dark, evening, god, party, गली, street, enemy, बज़्म, गुलाबी, pink, उदास, order, ग़ैर, name, comfort, मुदाम, always, सलाम, veil, hello, surrounding, चर्ख़, इल्हाम, समा, ऊँचाइयाँ, मुकाम, पर्दा, सरे-आम, दास्ताँ, success, in public. 11 Comments
वह चाँद वह सुहानी शाम फिर आये
गुलाबी आँखों का सलाम फिर आये
मैं भटक रहा हूँ अंधेरी गलियों में
चर्ख़ से वह इल्हाम फिर आये1
सुकूनो-सबात2 मेरा सब खो गया है
कैसे मेरे दिल को आराम फिर आये
बैठूँ जब मैं किसी बज़्मे-ग़ैर3 में
मेरे लबों पे तेरा नाम फिर आये
बहुत उदास है यह शाम का समा
शबे-दिवाली4 की धूमधाम फिर आये
मैं [...]
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