यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है
मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है
जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है
वह कोई और नहीं माहे-क़ामिल3 है
जिसने मुझको कहा सबसे अच्छा
वह कोई पारसा4 है या बातिल5 है?
तुम जाने किस बात पर रूठे मुझसे
लहू में ग़म हर क़तरा शामिल है
मेरा यह दिल आ गया तुम पर
तू मेरी पुरनम6 आँखों का हासिल [...]
Archive for February 12th, 2009
12 Feb




















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