Archive for February 8th, 2009

निकल न चौखट से घर की प्यारे जो पट के ओझल ठिटक रहा है

निकल न चौखट से घर की प्यारे जो पट के ओझल ठिटक रहा है
सिमट के घट से तिरे दरस को नयन में जी आ, अटक रहा है
अगन ने तेरी बिरह की जब से झुलस दिया है मिरा कलेजा
हिया की धड़कन में क्या बताऊँ, ये कोयला-सा चटक रहा है
जिन्हों की छाती से पार बरछी हुई है [...]

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