भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है
रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है
मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर हूँ
मेरे पाँव में पड़ी ज़ंजीर तुम्हारी है
मैं तेरे लिए अपनी जान तलक दे दूँगा
मैं तेरा राँझणा और तू हीर हमारी है
एक दिन तुमको मुझसे प्यार करना है
मेरे हाथों में प्यार की लक़ीर तुम्हारी है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४




















Posted by विनय on February 6, 2009 at 10:36 AM
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, आगे भी अपना प्रेम बनाये रखें!
Posted by ramadwivedi on February 6, 2009 at 10:17 AM
भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है
रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है
Bahut sach aur sundar abhivyakti….shubhakaamnaayen.
Posted by arsh on February 5, 2009 at 9:27 PM
देरी से आने के लिए मुआफी दोस्त… मगर बहोत ही खुबसूरत लिखा है आपने बेहद उम्दा लिखा है आपने हमेशा की तरह… ढेरो बधाई आपको…
अर्श
Posted by shobha on February 5, 2009 at 4:14 PM
बहुत सुन्दर लिखा है।
Posted by neeraj1950 on February 5, 2009 at 3:33 PM
मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर हूँ
मेरे पाँव में पड़ी ज़ंजीर तुम्हारी है
खूब कहा…वाह.
नीरज
Posted by राज भाटिया on February 5, 2009 at 2:58 PM
बहुत सुंदर.
धन्यवाद
Posted by Bavaal on February 5, 2009 at 1:38 PM
मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर हूँ
मेरे पाँव में पड़ी ज़ंजीर तुम्हारी है
बहुत लाजवाब विनय भाई
Posted by pankaj vyas on February 5, 2009 at 11:41 AM
vinaya prajapati ji
aapki rachana pasand aayeen hai. ise ratlam, jhabua(M.P.), Dahood(gujarat) se prakashit danik prasaran mai prakashit karane ja raha hoon.
kripaya, aapkra postal address mere mail par sen karen, taki aapko prati post ki ja saken.
thanks
pankaj vyas
pan_vya@yahoo.co.in
Posted by परमजीत बाली on February 5, 2009 at 11:17 AM
बहुत सुन्दर गीत है।बधाई।
Posted by seema gupta on February 5, 2009 at 10:54 AM
“किस घडी किस पल ख्याल तुमाहरा नही
मेरी सांसो से जुड़ी हर बात तुम्हारी है ”
Regards