ज़िन्दगी के दर्द बहुत ज़िन्दगी के काम आये
जिनसे मतलब नहीं था हमें वो मुक़ाम आये
अपनों का कब हमें नसीब साथ दो क़दम हुआ
तसल्ली के हाथों हमें’ ग़ैरों के सलाम आये
क्या किसने किया यह हिसाब मैं किस-किस को दूँ
हर एक ज़ुबाँ से मुझको सैकड़ों इल्ज़ाम आये
वह कहेंगे अगर तो हम अपनी जान दे देंगे
वह नहीं आते [...]
Archive for December 25th, 2008
25 Dec
ज़िन्दगी के दर्द बहुत ज़िन्दगी के काम आये
25 Dec
मैं हूँ हस्ति-ए-नाचीज़
मैं हूँ हस्ति-ए-नाचीज़’ मुझसे किसी को चाह नहीं
मैं हूँ शिगाफ़े-शीशा’ मुझसे किसी को राह नहीं
मैं आया हूँ जाने किसलिए इस हसीन दुनिया में
किसी की आँखों में मेरे लिए प्यार की निगाह नहीं
मैं हूँ अपने दर्दो-आहो-फ़ुगाँ की आप सदा
शायद इस गुमनाम रात की कोई सुबह नहीं
कोई क्या जाने तन्हाई के साग़र’ हमसे पूछो
कि अब मेरे इस [...]




















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