कुछ तो था कुछ तो है
तेरे-मेरे बीच सजनी
वरना तुम यहाँ न आती
वरना यादें तेरी न होती
यूँ बरस गुज़रते हैं
तेरे लिए तड़पते हैं
तन्हा-तन्हा रात-दिन
तेरे लिए तुम बिन
कुछ तो था कुछ तो है
तेरे-मेरे बीच सजनी…
तुमको पाना है मुझे
मुझको अपनाना है तुझे
ग़म ख़ुशी बन जायेगा
दोनों को क़रीब लायेगा
वरना तुम यहाँ न आती
वरना यादें तेरी न होती…
ख़ाब सच हो जायेंगे
हम-तुम मिल जायेंगे
प्यार होगा दरम्याँ
तेरी आँखों में मेरा जहाँ
कुछ तो था कुछ तो है
तेरे-मेरे बीच सजनी…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४




















Posted by विनय on December 13, 2008 at 3:39 PM
I must say MS ji ‘tumhein yaad karate-karate’ song was so romantic call picturised on Sadhana/Vaijanti JI.
Posted by MS on December 13, 2008 at 6:33 AM
Bahut khoob!
Aap ki kavita padkar mujhe pata naheen kyun yeh geet yaad aaya…