Archive for December 7th, 2008

मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी

मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी
जो दुआ में तू मुझे माँग पाये कभी
टूट चुके हैं मेरी तमन्ना के दोश
तू ख़ुद संभाला देने को आये कभी
कबसे गया है न आया आज तक
मेरी आरज़ू तुझे खींच लाये कभी
ख़ुदाया मैं भटक रहा हूँ सहराँ में
कोई इस तस्कीं को मिटाये कभी
ग़मगीन शाम है और उदास हम
क्यों गुफ़्तगू का [...]

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