मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी
जो दुआ में तू मुझे माँग पाये कभी
टूट चुके हैं मेरी तमन्ना के दोश
तू ख़ुद संभाला देने को आये कभी
कबसे गया है न आया आज तक
मेरी आरज़ू तुझे खींच लाये कभी
ख़ुदाया मैं भटक रहा हूँ सहराँ में
कोई इस तस्कीं को मिटाये कभी
ग़मगीन शाम है और उदास हम
क्यों गुफ़्तगू का [...]
Archive for December 7th, 2008
7 Dec
मेरा यह दर्द ख़त्म हो जाये कभी
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: attraction, आरज़ू, इश्क़, उदास, उल्फ़त, कशिश, ख़स्ता, ख़ुशबू, ख़ूबरू, ग़मगीन, गुफ़तगू, जादू, तमन्ना, तस्कीं, तस्वीर, दर्द, दिल, दीवाना, दुआ, दोश, नज़र, पयाम, प्यार, मजमूँ, मोहब्बत, राहे-जुस्ताजू, शाम, सहराँ, सुकून, हसरत, beautiful, care, comfort, crazy, desert, desire, evening, fragrance, heart, letter, love, lover, magic, message, pain, photo, prayer, sad, search, shoulder, sight, subject, talk, vanished, wish. 7 Comments




















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