रातभर चाँद देखा किये
माज़ी में उड़ रहीं थीं
तेरी यादें समेटा किये
रातभर चाँद देखा किये
कभी हाथ से ढका चाँद को
कभी बादलों से उठाया भी
गदेली पर रखकर उसे
कभी होंटों तक लाया भी
रातभर चाँद देखा किये
माज़ी में उड़ रहीं थीं
तेरी यादें समेटा किये…
सितारे टूटते बुझते रहे
उनसे तुम्हें माँगते रहे
ख़ाली था ख़ामोश था लम्हा
हम तेरा नाम लिखते रहे
रातभर चाँद [...]
Archive for December, 2008
29 Dec
रातभर चाँद देखा किये
25 Dec
ज़िन्दगी के दर्द बहुत ज़िन्दगी के काम आये
ज़िन्दगी के दर्द बहुत ज़िन्दगी के काम आये
जिनसे मतलब नहीं था हमें वो मुक़ाम आये
अपनों का कब हमें नसीब साथ दो क़दम हुआ
तसल्ली के हाथों हमें’ ग़ैरों के सलाम आये
क्या किसने किया यह हिसाब मैं किस-किस को दूँ
हर एक ज़ुबाँ से मुझको सैकड़ों इल्ज़ाम आये
वह कहेंगे अगर तो हम अपनी जान दे देंगे
वह नहीं आते [...]
25 Dec
मैं हूँ हस्ति-ए-नाचीज़
मैं हूँ हस्ति-ए-नाचीज़’ मुझसे किसी को चाह नहीं
मैं हूँ शिगाफ़े-शीशा’ मुझसे किसी को राह नहीं
मैं आया हूँ जाने किसलिए इस हसीन दुनिया में
किसी की आँखों में मेरे लिए प्यार की निगाह नहीं
मैं हूँ अपने दर्दो-आहो-फ़ुगाँ की आप सदा
शायद इस गुमनाम रात की कोई सुबह नहीं
कोई क्या जाने तन्हाई के साग़र’ हमसे पूछो
कि अब मेरे इस [...]
21 Dec
जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं
ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपना रहे जो
ऐसे लोग एक दिल में टिकते नहीं हैं
सूरत से जो सीरत को छिपाये फिरते हैं
वो कभी सादा चेहरों में दिखते नहीं हैं
होता है नुमाया दिल को दिल से, दोस्त!
मन के भेद परदों में छिपते नहीं [...]
20 Dec
यह मौसम भी तुम हो
यह मौसम भी तुम हो,
यह सावन भी तुम हो,
तुम हो… मेरे लिए…
मेरे सनम भी तुम हो
तुम नहीं होते’ तो तुम्हारा एहसास होता है
कोई जगता है रातों में, ख़ाबों के बीज बोता है
यह बिजली भी तुम हो,
यह बदली भी तुम हो,
तुम बूँदों में बरसती हो…
यह रिमझम भी तुम हो
गीले मन को बहुत सुखाया, मगर सूखा नहीं
मन [...]




















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