पूनम थी शाम जिसने देखा मुझे

पूनम थी शाम जिसने देखा मुझे
मैंने उसकी नज़र को उसने मुझे,

और चाँद रातभर रश्क करता रहा!


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

4 Responses to this post.

  1. मोहन जी , अल्पना जी और अर्श साहब बहुत-2 शुक्रिया!

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  2. Posted by arsh on November 16, 2008 at 2:59 PM

    bahot badhiy loot ke le gaye aap to …..bahot khub saab…maza aagaya isme to ..

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  3. चाँद रातभर रश्क करता रहा!

    bahut khuub!

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  4. और चांद रात भर रश्‍क करता रहा बहूत खूब भाई विनय अच्‍छा

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