Archive for November, 2008

सहने दे ग़म थोड़ा-थोड़ा

सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा
जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा
जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा
रहने दे आँखों को भरा-भरा
सपने सारे मेरे टूटे
जो साथी तुम मुझसे रूठे
मरना गर मेरा वफ़ा हो
तो मेरी जान क्यों ख़फ़ा हो
आना तो न जाना तुम कभी
तुमसे हैं मेरी जाँ ख़ाब सभी
साँसें बन जाओ ख़ाली सीने की
प्यास दे जाओ जीने की
दिल मेरा भी इक [...]

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I’m deserted with dreams

I’m deserted with dreams to feel the thirst
And trying to find all your best
I did each n’ every time what you wanted
But baby you were blind to count it
You did all the things well, except one
You couldn’t understand my comprehension
I love you truly more than my life
In this world you’re the one of my [...]

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मैं तुम्हें चाहता हूँ

मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है
आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले लो,
वरना ज़िन्दगी का एक-एक दिन तेरे इंतिज़ार में कटेगा
इक़रार: to confess | इज़हार: to express
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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रोज़ ही होता है

रोज़ ही होता है होंठों तक बात आते-आते रह जाती है
मेरी इक कमी तेरे रू-ब-रू मुझे लब खोलने नहीं देती
कितना मुश्किल है ख़ुद ही ग़लत होने का एहसास!
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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एक ख़ामोश अफ़साना

एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे
काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी,
इससे तेरी ज़िन्दगी के कुछ पल मेरे हिस्से तो आ जाते!
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

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