17
Oct
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: adore, affection, alone, असरकार, अक़ीदत, इल्तिजा, इश्क़, ख़ुदा, ख़ूबसूरत, तन्हा, दूसरा, नज़र, पारसा, प्यार, बातिल, बुरा, बेहद, मायने, मोहब्बत, यकता, यक़ीनन, रक़ीब, सदा, हसरत, क़ज़ा, bad, beautiful, call, death, deserted, desire, effective, enemy, god, liar, love, more than enough, request, saint, second, sight, unique, unlucky. 4 Comments
देखे जिसे कोई हसरतों से ऐसा तो नहीं हूँ मैं
अक़ीदत करें जिसकी वह ख़ुदा तो नहीं हूँ मैं
माना यकता हूँ मेरे जैसा कोई दूसरा नहीं
फिर भी हर मायने में पहला तो नहीं हूँ मैं
जी रहा हूँ अब तक बिन तेरे तन्हा-तन्हा
जो असरकार हो जाये वह सदा तो नहीं हूँ मैं
क्यों न थके मेरी ज़बाँ कहते-कहते [...]
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