बहुत पुराना है वह रिश्ता
जिसे गठरी में बाँधकर रखा है
मेहमान को बिठाया बाहर
घर को किराये पर दे रखा है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
Archive for October 12th, 2008
12 Oct
बहुत पुराना है वह रिश्ता
12 Oct
हम सब के सच्चे दोस्त हैं
हम सब के सच्चे दोस्त हैं
हर दिल की बात समझते हैं
उसकी ख़ुशी को हम अपने
ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३




















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