मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
जो मुझको भीड़ में अकेला छोड़कर गया है
सुबह आज भी उसको आइनों में जोड़ता हूँ
जो मेरे दिल को खिलौने-सा तोड़कर गया है…
बे-तस्कीनियाँ उजले चेहरों से बढ़ती हैं
हर पल मुझको अक्स की तरह पढ़ती हैं
अंधेरी रात है मैं छत पर तन्हा बैठा हूँ
एक-एक पल दोपहर-सा गुज़र रहा है…
कोई उठाये [...]
Archive for June 27th, 2008
27 Jun
मैं क्यों आज तक उसकी ख़ाहिश करता हूँ
Posted by विनय in मेरा गीत. Tagged: ख़ाब, चाँद, दर्द, heart, crowd, moment, अकेला, आइना, दिल, चेहरा, रात, pain, धुँआ, तन्हा, ख़ाहिश, हसीन, अक्स, dream, मुस्कुराहट, desire, सुबह, lonely, alone, आसमाँ, morning, लब, night, moon, लम्हा, टुकड़े, नदिया, sky, world, river, beautiful, lips, smile, insanity, भीड़, जहाँ, mirror, weak, jungle, जंगल, darkness, दोपहर, noon, ग़ुबार, गुलाबी, pink, अजीब, strange, peace, fog, piece, reflection, face, floor, style, ज़बाँ, language, अंधेरा, तस्कीन, छ्त, खिलौना, उजले, अम्बार, ज़ार, धुनकी, परवाज़, अन्दाज़, ख़ुदाया, toy, shiny, smoke, flying, o god!, rick-stand. 8 Comments




















कहते रहें Comments