हमने तुमको तुमसे चुराया
दिल में अपने तुमको बसाया
तुम भी दीवाने हो गये हो
दूर जो ख़ुद से हो गये हो
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
क़रीब आ तेरा दिल धड़का दें
दिल में कोई शोला भड़का दें
तुमको दोनों बाँहों में भरकर
सनम प्यार करना सिखा दें
तुम यह दिल तो धड़का दो
हमको प्यार तो सिखा दो
पर वादा करके ओ जानम
हमको छोड़ न जाना तुम…
ज़रा करके तो देखो हमपे भरोसा
मैं नहीं कर सकता तुमसे धोखा
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
दिल की ख़ाहिश तेरी ज़ुल्फ़ों में
आज हम ख़ुद को उलझा दें
तेरे गले लगके मेरे सनम
आज तुमको अपना बना लें
ज़ुल्फ़ों में उलझ तो जाओगे
मुझको अपना तो बनाओगे
पर क्या हम मिल पायेंगे
प्यार को सच कर पायेंगे…
दिल से दिल जब मिल जाये
यह प्यार भी सच हो जाये
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४




















Posted by विनय प्रजापति on June 21, 2008 at 2:25 PM
thanks Dr Saahab!
Posted by Dr Anurag on June 21, 2008 at 2:11 PM
दिल से दिल जब मिल जाये
यह प्यार भी सच हो जाये
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम
bahut achhe…..