तुमने हमसे हमको चुराया

तुमने हमसे हमको चुराया
दिल में अपने हमको बसाया
हम कुछ दीवाने हो गये हैं
हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम

यह उड़ते बादल घिर जायें
बिजली ज़रा कड़क जाये
तू मेरी बाँहों में आकर के
मेरे सीने से सिमट जाये

यह बादल क्यूँ घिर आयें
और बिजली क्यूँ गिर जाये
हम तेरे ही तो हैं आख़िर
आके ख़ुद ही लिपट जायें

यह सच भी सच कर दो
दिल में है जो कुछ कर दो
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम

क्यूँ इस तरह मुस्कुराती हो
क्यूँ तुम मुझसे शरमाती हो
क्यूँ एक झलक देकर कहीं
आँखों से ओझल हो जाती हो

हम सामने जो आ जायें
दिल बेक़ाबू न हो जाये
इश्क़ में यह डर है हमको
हमसे भूल न हो जाये…

दिल को बेक़ाबू हो जाने दो
यह भूल भी हो जाने दो
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४ 

One Response to this post.

  1. Posted by kumkum19 on August 19, 2008 at 11:51 PM

    beautiful.

    Reply

Respond to this post