न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है
तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ
कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है!
बाहम= आपस में
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४
14 Jun
न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है
तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ
कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है!
बाहम= आपस में
Posted by limit on July 4, 2008 at 12:28 PM
तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ
“beautiful words”
Regards