Archive for June 11th, 2008

छताँ लगा जाके मैं रोज़ चाँद तकियाँ

छताँ लगा जाके मैं रोज़ चाँद तकियाँ यार वास्ते
कि मेरा भी होवे यार चाँद जैसा दीदार वास्ते
कहाँ मिलेगा वह कब मिलेगा मुझको यार मेरा
हर गली घूमाँ हर सड़क फिरा दिलदार वास्ते
रब्बा मेरे, मुझसे मेरा यार मिला दे, मिला दे
सोणे यार दी मेरे तन्हा दिल से तड़प घटा दे
यार मिला दे, रब्बा मुझसे मेरा यार मिला [...]

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एक लड़की

एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घूमती है
ख़ाबों में भी आयी ख़्यालों को हैराँ किये रहती है
उसकी बातों में जाने कैसी ख़ुशबू है नाज़ुक मिज़ाज की
अदाए-हरकत है कभी गुल तो कभी मिराज़ की
यूँ तो इस जा में मेरी शख़्सियत है खाकसार-सी
लफ़्ज़ यूँ बुनती है’ जैसे हूँ तबीयत ख़ाबे-ख़ुमार की
चाहती क्या है, बात क्या है, [...]

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