Archive for June 1st, 2008

वह इक पल संजो लिया है

वह इक पल संजो लिया है
आँख में रखके भिगो दिया है
महक रहे हैं वह सारे लम्हे
ख़ुद को उनमें डबो दिया है
ख़ुश-रू तेरी मीठी-मीठी बातें
उफ़ तौबा यह हिज्र की रातें
धुँधले-धुँधले चाँद के चेहरे
गुज़र रही हैं मिसरी जैसी रातें
सोया जाऊँ यह रात तो गुज़रे
सुबह आयें तेरे ख़ाब सुनहरे
मुझको जगा दे उससे मिला दे
यार से मिलके यह ख़िज़ाँ [...]

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मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं

मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है
शाख़ों पर हैं नयी कोंपलें
जब से मौसमे-फ़ुर्क़त गुज़रा है
पुरवाइयाँ तन-बदन पे आग लगती हैं
तन्हाइयाँ मेरे ज़हन से ख़ौफ़ रखती हैं
निगाह में तस्वीरे-यार सजा ली जब से
रंगीनियाँ दिल को ख़ुशगँवार लगती हैं…
मस्तियाँ ही मस्तियाँ हैं
जब से मौसमे-ख़िज़ाँ उतरा है
बेलों पर महके गुच्छे
जब से हुआ यह मौसम हरा है
मेरी बेक़रारियाँ [...]

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