मुझसे कोई प्यार कर ले

मुझसे कोई प्यार कर ले
दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले
मुझसे कोई प्यार कर ले…

तन्हाइयों का दर्द छुपा रखा है
इसे कोई कभी दो आँखों से चुरा ले
मुझसे कोई प्यार कर ले…

यह हसीं जज़्बात टिके हुए हैं लबों पे
इन्हें कोई अपने लबों से चख ले
दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले
मुझसे कोई प्यार कर ले…

दु:ख यह मेरा दु:ख कब चुकेगा
तूफ़ान यह दिल में कब रुकेगा
मुझपे कोई एतबार कर ले
मुझसे कोई प्यार कर ले…

चेहरा जो दिल को अपना लगेगा
समा जो बस इक सपना लगेगा
वह उस ख़ाब में मुझको बुला ले
मुझसे कोई प्यार कर ले…

वह हुस्न की जादूगरी हो न हो
वह महजबीं या परी हो न हो
बस मुझे अपनी तक़दीर बना ले
मुझपे कोई एतबार कर ले…


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

4 Responses to this post.

  1. @ मधु समीर, बहुत ख़ूब…! आपका धन्यवाद!

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  2. Posted by MS on May 31, 2008 at 10:52 AM

    Jab din dhale, jyon hi raat ho
    Kisi diljale ki baraat ho
    Woh khalish kahan jo sabr de
    dil tod de, maan mod de,
    Yeh janoon kahe tumsein o sanam
    Ke mujhe kaheen koi pyaar kare

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  3. शुक्रिया महक जी!

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  4. Posted by mehhekk on May 30, 2008 at 10:05 PM

    तन्हाइयों का दर्द छुपा रखा है
    इसे कोई कभी दो आँखों से चुरा ले
    मुझसे कोई प्यार कर ले…

    यह हसीं जज़्बात टिके हुए हैं लबों पे
    इन्हें कोई अपने लबों से चख ले
    दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले
    मुझसे कोई प्यार कर ले…

    bahut hi sundar panktiyan,jazbaat bahut achhe se bayan karti hui.,bahut badhai

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