इश्क़ सुना है हमने बहुत

इश्क़ सुना है हमने बहुत
ज़रा करके तो देखें
मिल जाये कोई कमसिन हसीना
उसपे मरके तो देखें
हाए रे हाए, हाए रे हाए
इश्क़ करके तो देखें

सुना है हसीं होता है इश्क़
इश्क़ में सभी मौसम हसीं हो जाते हैं
ख़ुश्बू है कोई, हाथों से छुई
मुरझाये गुल, ताज़ा-तरीं हो जाते हैं

मिल जाये कोई कमसिन हसीना
उसपे मरके तो देखें
हाए रे हाए, हाए रे हाए
इश्क़ करके तो देखें

कोई फुलझड़ी, कोई रूबीना
कभी तो पास आये, लौ से लौ लगाये
आये ज़रा, लगके मेरे गले
दिल की प्यास बुझाये, बे-तस्कीं मिटाये

अब तक हसीं, देखे कई
वह तो इनमें नहीं हैं
हाए रे हाए, हाए रे हाए
वह तो और कहीं हैं

कमबख़्त यह दिल परेशाँ
जलता है ख़ुद, मुझको जलाता भी है
ऐ मेरे ख़ुदा क्या मुझसे गिला
तू क्यों मुझको उससे मिलाता नहीं है

इश्क़ सुना है हमने बहुत
ज़रा करके तो देखें…


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

13 Responses to this post.

  1. Posted by MS on May 31, 2008 at 10:05 AM

    :)

    Reply

  2. @ Madhu Ji,

    I am not computer, I can understand where typos come… but thanks for correction!

    Reply

  3. Posted by MS on May 30, 2008 at 11:50 PM

    Oops there are so many typos. My apologies…I was almost asleep…

    COrrected lines:

    Bevajah muskurahat koi shararat to nahin

    Ehsaas-e-khalish-e-marasim sataye lamha lamha

    Reply

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