Archive for April 18th, 2008

रात चाँदनी का दरया हुई

रात चाँदनी का दरया हुई
चल चाँद की कश्ती में दूर चलें
बादलों के पीछे,
तारों की छाँव में…
प्यार का हसीन कसूर करें
आज दिल दिल के क़रीब है
आज मोहब्बत ख़ुशनसीब है
तेरा मुझसे मिलना,
इत्तिफ़ाक़ नहीं…
क्यों हम एक-दूसरे से दूर रहें
रात चाँदनी का दरया हुई
चल चाँद की कश्ती में दूर चलें
गुलाबी फूल दिलों में खिले हैं
नयी ख़ुशबू जिस्मों में घुले [...]

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