Archive for April 9th, 2008

जब कभी मैंने साँस ली

जब कभी मैंने साँस ली
साथ तेरे नाम की फाँस ली
पहरों नाराज़ थे ख़ुद से
आज गुज़रे हैं हद से
बेताब हैं तेरे प्यार में
फिर जायें कैसे ज़िद से
जब कभी मैंने साँस ली…
शहद जैसी शाम घुल गयी
हमको ज़िन्दगी मिल गयी
मोगरे के फूल जब खिले
उनमें तेरी हँसी मिल गयी
जब कभी मैंने साँस ली…
आँखों में तेरे ख़ाबों की रिदा है
धड़कनों [...]

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