आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे राहें जुड़ने लगीं
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे प्यार हो गया
आहिस्ता-आहिस्ता दोनों निगाहें लड़ने लगीं
तुमसे कहना था संग तेरे जीना है मुझको
प्यार को तुम्हारी आँखों से पीना है मुझको
ज़िन्दगी क्या है तुमसे मिलके जाना मैंने
सिवा तुम्हारे दिल के’ चैन कहीं न है मुझको
वह पहली नज़र और वह दिलकश समाँ
वह हुस्नो-अदा और वह मौसम ख़ुशनुमा
बदला-बदला [...]
Archive for April 3rd, 2008
3 Apr
आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं
3 Apr
हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ
हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ
मैं भटकता रहा यहाँ-वहाँ
बेताब है हर लम्हा नज़र
उतरे न इश्क़ का ज़हर
प्यास है तेरे दीदार की
चाहत है तेरे एतबार की
रुख़ पे ज़ुल्फ़ परेशान है
अधूरी तेरी-मेरी दास्तान है
तस्वीरें तेरी चुनता रहा
रोज़ नये ख़ाब बुनता रहा
तस्वीरों से बात करता हूँ मैं
प्यार तुमसे करता हूँ मैं
संगदिल से इल्तिजा की
ख़ुदा से तेरे लिए दुआ [...]




















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