हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’
यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे
यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Mar
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: ache, इश्क़, जाविदाँ, जीत, दर्द, नज़र, प्यार, बाज़ी, मोहब्बत, हौसला, ज़ख़्म, bet, courage, gamble, immortal, love, nazar, pain, scar, victory, wound. Leave a Comment
हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’
यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे
यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले
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