Archive for March 26th, 2008

हम में जीतने का हौसला है

हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’
यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे
यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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