Archive for March 25th, 2008

शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं

शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों नहीं
डर-सा बैठा है दिल में तुम्हें खो न दूँ कहीं
तिलिस्म यह मेरी आँखों का टूट न जाये कहीं
तुमने जहाँ छोड़ा था मुझे मैं आज भी हूँ वहीं
यह फूल हल्के गुलाबी यह आसमाँ आसमानी
सब उदास हैं इक तेरे न होने से और मैं भी
वह यादें मुस्कुराती हुई [...]

Continue reading »