21
Mar
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: अधूरा, आलेखन, ख़ाब, ख़ुशियाँ, ग़ैर, घर, झोली, ठिठोली, डोली, दर्द, मज़ा, रंग, रंगोली, लुत्फ़, संजो, होली, bag, collect, colours, delineation, design, Doli, dreams, festival of Holi, fun, happiness, Holi, home, incomplete, jokes, pain, palankeen, palanquin, Rangoli, stranger. 4 Comments
तुम नहीं तो रंग नहीं होली में
नहीं सजता आलेखन रंगोली में
है दर्द में आज भी वही मज़ा
न है लुत्फ़ ग़ैर की ठिठोली में
इसमें क्या जाता, तेरा ख़ुदाया!
जो चंद ख़ुशियाँ होतीं मेरी झोली मेँ
मैं संजो रहा हूँ इक अधूरा ख़ाब
कि तुम आती मेरे घर डोली में
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४-२००५
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21
Mar
Posted by विनय in मेरा गीत. Tagged: alone, आँखें, आँसू, इश्क़, ख़्याल, गुलाबी, चैन, जादू, डाली, तन्हा, दिन, दिल, दूर, धड़कन, निगाह, नूर, प्यार, फूल, बेक़रारी, मग़रूर, मोहब्बत, मौसम, मज़कूर, याद, वादी, सिलसिला, सुरूर, सौदा, हूर, फ़िज़ा, branch, comfort, craze, day, discussion, distance, eyes, fairy, faraway, flower, happenings, heart, heartbeat, love, magic, memory, pink, proudy, reminisce, season, shine, sight, spell, surroundings, tears, tension, thoughts, traquility, valley, vicinity. 2 Comments
आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जानता हूँ
तुम लौटकर आओगी ज़रूर
यह दिल तन्हा कहाँ है
इसमें यादें हैं तुम्हारी
तुम रहो कितने भी दूर
देखता हूँ तुम्हें
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर
तुमसे प्यार किया है
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर
पास आने के दिन आ गये
धड़कनों में बेक़रारी है
दिल [...]
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