Archive for March 21st, 2008

तुम नहीं तो रंग नहीं होली में

तुम नहीं तो रंग नहीं होली में
नहीं सजता आलेखन रंगोली में
है दर्द में आज भी वही मज़ा
न है लुत्फ़ ग़ैर की ठिठोली में
इसमें क्या जाता, तेरा ख़ुदाया!
जो चंद ख़ुशियाँ होतीं मेरी झोली मेँ
मैं संजो रहा हूँ इक अधूरा ख़ाब
कि तुम आती मेरे घर डोली में
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४-२००५

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आँखों में आँसू नहीं आते

आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जानता हूँ
तुम लौटकर आओगी ज़रूर
यह दिल तन्हा कहाँ है
इसमें यादें हैं तुम्हारी
तुम रहो कितने भी दूर
देखता हूँ तुम्हें
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर
तुमसे प्यार किया है
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर
पास आने के दिन आ गये
धड़कनों में बेक़रारी है
दिल [...]

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