इश्क़ क्या हमको मारेगा

इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे
अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे

जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

4 Responses to this post.

  1. Posted by Sarita on April 4, 2008 at 3:35 PM

    इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे
    अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे

    जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
    वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे

    Cool…

    Reply

  2. Posted by Brijmohanshrivastava on March 26, 2008 at 3:13 PM

    isq marta nahin jilata hai
    isq harata nahi jitata hai

    Reply

  3. जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
    वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे

    aafarin,wah tuk bandi ho to aise,ishq se hi lad baithe,awesome.

    Reply

Respond to this post