इश्क़ क्या हमको मारेगा

March 18, 2008 at 1:44 pm (फुटकर कलाम) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे
अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे

जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

4 Comments

  1. mehek said,

    March 19, 2008 at 12:40 am

    जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
    वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे

    aafarin,wah tuk bandi ho to aise,ishq se hi lad baithe,awesome.

  2. विनय प्रजापति said,

    March 19, 2008 at 1:06 am

    shukriya!

  3. Brijmohanshrivastava said,

    March 26, 2008 at 3:13 pm

    isq marta nahin jilata hai
    isq harata nahi jitata hai

  4. Sarita said,

    April 4, 2008 at 3:35 pm

    इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे
    अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे

    जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
    वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे

    Cool…

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