निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में
ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था
अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
17 Mar
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: इश्क़, जुदा, निख्खा, प्यार, मरासिम, मोहब्बत, शक्कर, ज़हर, ज़्यादा, different, love, more, poison, pure, relation, sugar. Leave a Comment
निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में
ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था
अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ
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