दिल का जला होता तब रोशनी होती
मैं तो जला हूँ चश्मे-अश्कबारी का…
अब मेरी ख़ाक इक निहाँ दलदल है!
चश्मे-अश्कबारी= rain of tears, निहाँ= hidden, buried
दलदल= marsh, quagmire, ख़ाक= ash, dust
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
17 Mar
दिल का जला होता तब रोशनी होती
मैं तो जला हूँ चश्मे-अश्कबारी का…
अब मेरी ख़ाक इक निहाँ दलदल है!
चश्मे-अश्कबारी= rain of tears, निहाँ= hidden, buried
दलदल= marsh, quagmire, ख़ाक= ash, dust
Posted by विनय प्रजापति on March 18, 2008 at 10:21 AM
Thanks, Param and Rohit, Both of you!
Posted by Rohit Jain on March 18, 2008 at 10:17 AM
बेहद खूबसूरत
Posted by paramjitbali on March 18, 2008 at 1:10 AM
बहुत बढ़िया!!
Posted by विनय प्रजापति on March 17, 2008 at 9:27 PM
शुक्रिया, अपना प्रेम भाव बनाये रखिए।
Posted by MEET on March 17, 2008 at 9:24 PM
भाई वाह ! बहुत बढ़िया है.