Archive for March 17th, 2008

दिल का जला होता तब रोशनी होती

दिल का जला होता तब रोशनी होती
मैं तो जला हूँ चश्मे-अश्कबारी का…
अब मेरी ख़ाक इक निहाँ दलदल है!
चश्मे-अश्कबारी= rain of tears, निहाँ= hidden, buried
दलदल= marsh, quagmire, ख़ाक= ash, dust
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे

यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे
मगर जो तुम पर मिट गया वह ‘नज़र’ है
मेरी इब्तिदा तुम हो, मेरी इन्तिहाँ तुम हो!
इब्तिदा= beginning, start, इन्तिहाँ= end, zenith
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में

निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में
ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था
अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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