ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी
और मवाद के दरिये बहेंगे
हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा
एक दिन सबके नज़रिये कहेंगे
शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’
लेखन वर्ष: २००३
16 Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, ख़राश, घाव, नज़रिये, प्यार, मोहब्बत, लाग, वफ़ा, ज़ख़्म, enmity, love, loyalty, scar, viewpoint, wound. Leave a Comment
ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी
और मवाद के दरिये बहेंगे
हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा
एक दिन सबके नज़रिये कहेंगे
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