16
Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, जिगर, नज़र, प्यार, बदरा, बिछोह, मोहब्बत, मौत, सावन, हश्र, ज़ख़्म, climax, cloud, courage, death, fate, heart, love, nazar, rain, scar, separation, wound. Leave a Comment
ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम?
बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम?
अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र’ आज
मौत यह मुझको सताये, कहाँ हो तुम?
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
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16
Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, ख़ुशबू, चिठ्ठी, पैग़ाम, प्यार, बदन, बेक़रारी, मोहब्बत, body, fragrance, letter, love, message, uneasiness. 5 Comments
ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं
पैग़ामे-मोहब्बत चिठ्ठियाँ लाती नहीं
तुम क्या जानो बेक़रारी मेरी प्यार में
तुमसे जुड़ी कोई बात भूली जाती नही
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
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16
Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, ख़राश, घाव, नज़रिये, प्यार, मोहब्बत, लाग, वफ़ा, ज़ख़्म, enmity, love, loyalty, scar, viewpoint, wound. Leave a Comment
ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी
और मवाद के दरिये बहेंगे
हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा
एक दिन सबके नज़रिये कहेंगे
शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’
लेखन वर्ष: २००३
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