शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा
चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा

सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब्बत
छेड़छाड़ दोस्तों की और ख़्याल तेरा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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