सदियाँ कटता रहूँगा

March 15, 2008 at 9:15 am (फुटकर कलाम) (, , , , , , , , , , , )

सदियाँ कटता रहूँगा
वक़्त गुज़ारता रहूँगा
तुम जो हँसते रहो
मैं भी हँसता रहूँगा..


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२

1 Comment

  1. Brijmohan shrivastava said,

    March 31, 2008 at 12:16 pm

    मैं हँसता रहूँगा और तुम्हे हँसाता रहूँगा…

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