मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब
मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ
तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली?
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
15 Mar
मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब
मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ
तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली?
Posted by Brijmohanshrivastava on March 26, 2008 at 3:02 PM
sur nar muni sab ki yeh riti
swarath lag karen sab priti