लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम
जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था
इस बरस होली के रंग रास नहीं आयेंगे…
सरे-बाम= छत के ऊपर, छज्जे पर, on the roof
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
15 Mar
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: रंग, इश्क़, love, क़रीब, प्यार, मोहब्बत, बिछोह, separation, beloved, near, colour, apart, बरस, lover, जानम, बाम, roof, year, होली, festival of Holi, रास, splendid. Leave a Comment
लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम
जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था
इस बरस होली के रंग रास नहीं आयेंगे…
सरे-बाम= छत के ऊपर, छज्जे पर, on the roof
विनय प्रजापति 'नज़र'
Vinay Prajapati 'NAZAR'
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