लो! यह दिन भी क़रीब आ गये
लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम
जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था
इस बरस होली के रंग रास नहीं आयेंगे…
सरे-बाम= छत के ऊपर, छज्जे पर, on the roof
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
March 15, 2008 at 10:23 am (मेरी त्रिवेणी) (apart, इश्क़, जानम, प्यार, बरस, बाम, बिछोह, मोहब्बत, रंग, रास, होली, क़रीब, beloved, colour, festival of Holi, love, lover, near, roof, separation, splendid, year)
लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम
जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था
इस बरस होली के रंग रास नहीं आयेंगे…
सरे-बाम= छत के ऊपर, छज्जे पर, on the roof
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