जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे
जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे
हम को शाइर तो न समझते होंगे
‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐसा
लिखने की कौन-सी तरक़ीब रखते होंगे
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२
March 15, 2008 at 9:03 am (फुटकर कलाम) (तरक़ीब, शाइर, शाइरी, शायर, शायरी, फ़न, poet, poetry, style, trick)
जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे
हम को शाइर तो न समझते होंगे
‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐसा
लिखने की कौन-सी तरक़ीब रखते होंगे
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Brijmohan shrivastava said,
March 31, 2008 at 12:20 pm
वैसे तो हैं यहाँ भी शायर बहुत अच्छे पर हम ये कहते है की विनय जी का है अंदाजे-बयाँ और…
shubhashishpandey said,
April 12, 2008 at 3:52 pm
jab bhi lahu jigar se koi panno ko rang deta hai ,
koi use sher to koi ghazal samjh leta hai .
-Shubhashish