दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी
मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें
दूर-दूर तक इसमें तेरे दिए ज़ख़्म ज़िन्दा हैं…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
15 Mar
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: इश्क़, ख़ला, दिल, धोखा, प्यार, मोहब्बत, सय्यारा, ज़ख़्म, ज़िन्दा, cheat, emptiness, heart, live, love, meteor, scar, wound. Leave a Comment
दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी
मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें
दूर-दूर तक इसमें तेरे दिए ज़ख़्म ज़िन्दा हैं…
विनय प्रजापति 'नज़र'
Vinay Prajapati 'NAZAR'
Blog at WordPress.com. Theme: SpringLoaded by the449.