दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं
दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं
उनके दीदार से जो मुझे सुकून है
दिल में जाने क्या सोचकर वह बैठे हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
15 Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, चुप, तन्हाई, दरवाज़े, दिल, दीदार, प्यार, मोहब्बत, सुकून, सोच, comfort, door, easiness, heart, love, sight, silent, solitude, think, thought. Leave a Comment
दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं
दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं
उनके दीदार से जो मुझे सुकून है
दिल में जाने क्या सोचकर वह बैठे हैं
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