Archive for March 15th, 2008

मैं मर जाऊँ तो

मैं मर जाऊँ तो
अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो
क्या तुम जी सकोगी, बोलो…!
सीने जो एक दिल है
इसमें तेरा ही प्यार है
मेरे प्यार को भुला सकोगी, बोलो!
आँखों में सपने तेरे जाते नहीं
और यह चैन दिल को पहुँचाते नहीं
मुझको दीवाना कर छोड़ा है तुमने
और तुम मुझको आज़माते नहीं
मैं मर जाऊँ तो
अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो
क्या तुम [...]

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वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
जिस दिन भी पुकारा उसने मुझे
मेरे मद्यए-मुक़ाबिल के सर मौत का सेहरा होगा
वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
मैं दूर से ही देखकर उसे ज़िन्दा हूँ
हूँ इन्तिज़ार में वह किस दिन मुझे पुकारेगा
वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
उसके हाथों की लकीरें मैंने देखी नहीं
लेकिन ज़रूर इनमें मेरे चाँद [...]

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इक दिन तू चली जायेगी

मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी
कि इक दिन तू चली जायेगी
एतबार मैं तेरा कर तो लूँगा
मगर इक दिन तू चली जायेगी
ख़ूबसूरत यह दिन, हसीन यह पल
साथ जो तेरे मैंने गुज़ारे हैं
सारे जहाँ की चाहत है इनमें
और यह सब तुम्हारे हैं, सब तुम्हारे हैं
मैं वही दरख़्त हूँ
जिस पर मौसम आते रहे, जाते रहे
इक बहार [...]

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शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा
चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा
सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब्बत
छेड़छाड़ दोस्तों की और ख़्याल तेरा
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं

दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं
दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं
उनके दीदार से जो मुझे सुकून है
दिल में जाने क्या सोचकर वह बैठे हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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